हम सपने क्यों देखते हैं ?

हम सपने क्यों देखते हैं ?

सपनो की दुनिया (१)

सपनो की दुनिया की भी एक अलग ही दुनिया हैं | जिसकी कल्पना हमे करना बहोत कठिन हैं क्युकी की मनुष्य के स्वाभाव में निरंतर बदलता रहता हैं | ऐसे बदलते स्वाभाव को समझना २०२० में कठिन हैं शायद हम भविष्य में इसको समझ पाए | विज्ञानं की दुनिया बहोत बड़ी दुनिया हैं लेकिन इसके बावजूद बहोत सारे रहस्य हैं जो अभी के लिए विज्ञानं के पहोच से बाहर हैं जैसे सबसे बड़ा सवाल क्या भगवान् होते हैं ? और मृत्यु के बाद क्या होता हैं ? अगर हम अपनी तार्किक दृष्टिकोण से देखे तो हम भगवान न होने का प्रमाण देंगे लेकिन विज्ञानं के पास इसका कोई ठोस साबुत नही हैं और न ही भगवान हैं इसका दावा देने वाले और इंसान के मरने के बाद क्या होता हैं ये सिर्फ मरने वाला ही बता सकता हैं जो आज के वक्त नामुनकिन हैं | विज्ञानं का मानना हैं की मरने के बाद शरीर निसर्ग के तत्वों में सन्मिलित हो जाता हैं और हमारे निर्जीव शरीर से कुछ धाराये(String Theory) निकलती हैं जो ब्रह्मांड में फ़ैल जाती हैं | पर इसका भी कोई ठोस सबुत नही मिलता हैं |

    विज्ञानं के की सीमाए जैसे भगवान और मृत्यु के रहस्य पर आकर रुक जाती हैं वैसे एक और बड़ा रहस्य हैं जिसे सपना कहते हैं | सपना एक ऐसा रहस्य हैं जिसे समझना बहोत कठिन होते जा रहा हैं इसके साथ साथ बहोत सारे सवाल भी हमारे लिए खड़े हो रहे हैं जैसे हम सपने क्यों देखते हैं ? हमे सपने क्यों आते हैं ? क्या हम सपनो की दुनिया में जा सकते हैं ? सपनो का हमारी जिन्दगी से क्या संबध हैं ? हम सपनो को याद क्यों नही रख पाते है ? हमारे सपनो पर हमारा नियंत्रण क्यों नही होता ? ऐसे बहोत सारे सवाल जो वर्तमान में हमारे विज्ञानं के पहोच से बाहर हैं |  लेकिन ये जानना भी बहोत जरुरी हैं की ऐसी कौनसी शक्ति हैं जो हमे सपने देखने पर मजबूर करती हैं और यहाँ तक की जानकारियों पाया गया की कुछ धर्मो में सपनो को भगवान के संदेश भेजने का एक तरीका कहा गया हैं लेकिन ये उतना ही सच जितना की भगवान होने का झूठ या सच |

 

मैं अपने तथ्य व् अपनी बात अपने अनिभव व् अपने अभ्यास के आधार पर रखता हूँ | मैंने खुद पर ध्यान दिया और सपनो के रहस्य को समझने की कोशिश की लेकिन जैसा हर बार हुआ इस बार भी मैं उस रहस्य को समझ नही पाया बहोत निराशा और असफलता के साथ मै विफल हुआ पर मैंने दोबारा कोशिश की इस बार मैंने पुरे 21 दिन तक खुद पर ध्यान दिया अपने सपनो का आलांकन किया | सबसे पहले बता दू  की 21 दिन तक ये परिक्षण का ख्याल मैंने मानसशास्त्र से लिया हैं जो सच में कारगर साबित हुआ लेकिन मुझे इसमें पूरी तरह से सफलता नही मिल पायी पर जो जानकारी और तथ्य मेरे  सामने आये उससे मुझे यकीं हो गया हैं की इन सपनो की शुरुआत कहा से होती हैं और क्यों हमें ये सपनो दीखते हैं | मैं आपको अभी भी सचेत करना चाहता हूँ की मैं ये सब अपने खुद के द्वारा किये गए परिक्षण व् अभ्यास के आधार पर कह रहा हूँ अगर आप सपनो के बारे पढ़ रहे हैं तो मैं चाहूँगा की आप अच्छे विशेषज्ञों से अवश्य सलाह ले मैं एक आज़ाद विज्ञानवादी मनुष्य हूँ मैं सिर्फ अपने सवालो के हल ढूढने में निरंतर डूबा रहता हूँ |

चलो मैं बताता हूँ की 21 दिन के उस परिक्षण में मैंने ऐसा क्या पाया जो मैं आपको से कहना चाहूँगा सबसे पहले दिन तो मैंने क्या सपना देखा ये मुझे याद ही नही था सपने देखने की जिज्ञासा में मुझे नींद ही नही लग रही थी लेकिन पता नही कैसे मेरी आख लग गई लेकिन मैंने जब सुभ उठकर देखा तो मुझे कुछ भी याद नही था तब मैंने अपनी मम्मी से इसके बारे में पुचा की मैं कब सोया तो उन्होंने बताया की देर रात में मैं सो गया असल में मम्मी घर में कुछ कर रही थी इसीलिए वे उस रात को सुभ सोयी थी उन्होंने मुझे बताया की मैं अपने निंद्रा में कुह बड़बड़ा रहा था और हाथ पैर हिला रहा था लेकिन आश्चर्य की बात ये हैं की मुझे इसके बारे कुछ क्यों नही मालूम ऐसी कौनसी तिथि में मैं चला गया था की मुझे ही याद नही की मैं सोते वक्त कहा था | मुझे वहां एक सवाल आया की हम नींद के वक्त कहा होते ? क्यों हमे याद नही रहता? असल में होता क्या हैं हमारे साथ? क्यों हमारा दिमाग हमें वह स्मरण नही कराता  ? दिमाग ही हमे सपने दिखता हैं फिर वो दिखने के बाद उसे स्मरण करने की ताक़त क्यों नही रखता ? अब मुझे सपनो के रास्यो की दुनिया पहले से ज्यादा गहरी लगने लगी थी मैंने बहोत कोशिश की उन सपनो को याद करने लेकिन मुझे याद नही आया मैं बड़ी ही निराशा के साथ अपने लैपटॉप लेकर बैठ गया और मैंने दिमाग के बारे पढना शुरू किया और मैंने देखा और खुद की तर्कशक्ति से दिमाग को सझने का प्रयत्न किया की हमारा पूरी तरह से हमारे दिमाग पर नियंत्रण ही नही हैं हमारी स्मरण शक्ति ध्यान से बढती हैं लेकिन वह फिर भी आसानी से नियंत्रित नही होती | मैंने ध्यान की बात सुनकर एक बुद्धिष्ट भंते से जाकर इसके बारे में जानकारी ली वो बुद्धिष्ट भंते ध्यान के लिए बहोत मशहूर था उसके बातो से मैंने गौतम के बारे में पढ़ा मैंने पाया की गौतम बुद्ध ही एकमात्र ऐसे मनुष्य थे जिन्होंने अपने दिमाग पर पूरी तरह से अपना नियंत्रण पा लिया था | लेकिन फिर भी मेरे मन में एक ही सवाल आरहा था की सपने देखते वक्त हमे हमारी वर्तमान स्तिथि का पता क्यों नही रहता हैं बस इसी सवाल को अपने मन में दबाये मेरी दूसरी रात भी निकल गई और मैं उस सुब ५ बजे ही सो कर उठ गया और ध्यान लगाने बैठ गया मुझे मेरा सपना धुंधला-धुंधला दिखने लगा था | मैंने अपने सपने में वही देखा जो मैंने पिछले दिनों करने की कोशिश की थी लेकिन सपने में मेरी उप्लाभ्दिया कुछ ज्यादा ही अविश्वसनीय थी क्युकी सपने में मैं किसी और देश में था लेकिन मैं वही काम कर रहा था जो मैंने अपने पिछले दिन किया था | मैंने अपने सपने को एक पेज पर लिख दिया और साथ में कुछ सवालों के घेरे में मैं और मेरा मन खो गया | सबसे पहला सवाल तो ये आया की मैं सपने में किस जगह में था ? दूसरा ये सवाल था की मै अपने सपने में सिर्फ खुद को देख पा रहा था लेकिन मैं क्या सोच रहा था मुझे पता क्यों नही चला ?

 

अगर कोई विज्ञानवादी  दोस्त होंगा तो कृपया मुझे इन सवालों के जवाब दे मैं जल्दी ही अगले भाग के साथ आपके सामने हाजिर रहूँगा | अगर मेरे आर्टिकल पर आपको कुछ टिपण्णी देना हैं तो कृपया विस्तार में दीजिये और इसे अपने विज्ञानवादी दोस्तों के साथ शेयर करे देखते कितने लोग मेरे साथ इस रहस्य को सुलझाने में मेरी मद्दत करेंगे |

 

 

No comments

Powered by Blogger.