हम सपने क्यों देखते हैं ? (भाग-२)

हम सपने क्यों देखते हैं ?

सपनो की दुनिया (२)

 

पिछली बार मैंने 21 दिन के स्वंय परिक्षण के बारे में बात किया था और मैंने वहा सपनो और विज्ञानं के बारे में बताया हैं अगर आपने वो लेख नही पड़ा तो आप रुक जाईये वहां जाकर पढ़िए मैं लिंक आखरी में दे दूँगा | सपनो के परिभाषा के ऊपर मैं किसी पर भी सहमत नही हूँ क्युकी मुझे नही लगता की सपनो का किसी भी तरीक़े से किसी का अधिकार होता हैं |

 

पिछली बार दुसरे दिन के उस सवाल से मैं बेहद परेशान था मुझे समझ नही आ रहा था की मैं अपने सपने में खुद की सोच को क्यों महसूस नही कर पा रहा था मुझे ऐसा लग रहा था की मैं कोई फिल्म देख रहा हूँ जिसमे मैं मुख्य किरदार में हूँ | बड़ा ही अजीब लग रहा था आखिर क्यों मैं खुद की सोच को देख नही पा रहा था ? आखिर वो मैं ही था या कोई और या फिर वो कोई अलग ही दुनिया हैं ? सवालो के ऊपर सवाल मेरे मन में उठ रहे थे और जवाब का कोई नामो निशान नही मुझे हर बार की तरह २ दिन भी सिर्फ असफलता और निराशा ही हाथ लगी लेकिन सवाल नए नए मिले मैंने उन सवालों को इन्टरनेट पर भी खोजा लेकिन मुझे कोई संतुष्ट जवाब नही मिला | असंतुष्ट मुझे मन ही मन खाए जा रहा था लेकिन मुझे मेरे सवालों का जवाब चाहिए था इसी सिलसिले में मेरे ९ दिन गुजर गए थे | लेकिन मुझे किसी भी सवालों का जवाब नही मिला था पर एक अच्छी बात मैंने महसूस की थी की मेरी स्मरण शक्ति बढ़ गई हैं | इसी स्मरण शक्ति के कारण मैं अपने सपनो को बढे ही अच्छे तरीक़े से याद रख सकता था पर चिंता इसी बात की थी की मुझे मेरे सवालों के कोई जवाब नही मिले उसके विपरीत मेरे सपने मुझे और नए सवालों को मेरे पास छोड़ गए | कुछ सवाल तो मुझे बहोत ही ज्यादा आश्चर्यजनक लगे जैसे सपनो में हमे कैसे नए चीजे दीखते हैं जिनको हमने कभी असली जिन्दगी में देखा ही नही ? हमारे सपनो पे हमारा नियंत्रण नही होता तो हमे क्यों दीखते हैं ? हमारे सपने हमे दोबारा क्यों नही दीखते हैं ? सपनो में हमे दुसरो की मौते क्यों दिखती हैं ? हमारे सपनो में हमारी ही मौत क्यों होती हैं ? क्या सपनो में जो होता हैं साली जिन्दगी में हो सकता हैं ?  सपनो में हमे असली जिन्दगी में मरे हुए लोग क्यों दीखते हैं ? सपने हमे ज्यादा देर तक क्यों नही दीखते ? हम न चाहते हुए भी बुरा सपना क्यों देखते हैं ? सवाल के ऊपर ही सवाल ही पैदा होते लेकिन कोई जवाब नही पर ऐसा क्यों हो रहा था ये भी सबसे बड़ा सवाल हैं क्यों मैं अपने जवाब को धुंध नही पा रहा था |

 

१२ दिन चल रहा था फिर मैंने Albert Einstine के समय के ऊपर उनका लेख पढ़ा और मुझे वहाँ अपने सवालों के जवाब ढूढने के लिए विज्ञानं की बड़ी रहस्मयी व् महानवैज्ञानिक द्वारा मद्दत मिली | आपने गौर किया या नही मुझे नही मालूम लेकिन जब हम सपनो में होते हैं हमारे लिए समय सपनो में बहोत जल्दी निकल जाता और कभी बहोत देर से कभी-कभी हम सुभ उठकर हैरान होते हैं की हम इतने जल्दी कैसे उठ गए  | १२ दिन बाद जब मैं सोकर उठा तो मैंने ये बात मान ली की सपनो में जो वक्त होता हैं और हमारे वक्त में अंतर हैं | ये मेरे लिए सच में एक बहोत रोमांचक घटना थी क्युकी इसीसे मैं सपनो के रहस्य को समझने के आगे चल रहा था | अब मुझे लगने लगा था की सपनो की दुनिया भी एक सच में एक दुनिया हैं | लेकिन सवाल वही के वही थे यहाँ तक की वे और मुश्किल हो गए थे, जैसे की अगर सपनो की दुनिया हैं तो हमे क्यों दीखते हैं ? सवालों के पूछने के तरीक़े बदल गए लेकिन सवाल नही सवाल जहाँ के वहां ही थे | मुझे जिज्ञासा की भूक सी लगने लगी थी मुझे बहोत सारा ज्ञान महसूस होने लगा था मैं अभी कुछ ज्यादा ही सोने की इच्छा प्रकट करने लगा था क्यों की मुझे सपनो की दुनिया अच्छी लगने लगी थी मेरी कल्पना शक्ति द्वारा मैं अपनी सपनो की दुनिया को खुली आखों से देख पा रहा था | १३ दिन आ गया मैंने इस बार बहोत रोमांचक सपने को महसूस किया | उस सपने में मैंने सपनो की दुनिया के बारे में कुछ लोगो को अपने मत आगे रखते हुए देखा और उसमे मेरे ही लेखो के ऊपर बात की जा रही थी मैं बहोत ही हैरान था क्या वो मुझे अपना भविष्य बता रहा था | बड़ा ही अनोखा सा सवाल मेरे सामने आगया की जो घटना हुई ही नहीं जीसकी कल्पना मैंने की ही नहीं मुझे वो दिखा कैसे | कुछ बातों से मैं सहमत था और कुछ बातो से नही क्युकी मुझे ऐसा लग रहा था की क्या हमारे सपनो में भविष्य और भूतकाल में जाने का रहस्य जुड़ा हुआ हैं | पर ये बहुत ही बेतुकी कल्पना थी लेकिन मैंने उसी दिन युग के एक महान वैज्ञानिक Nikola Tesla के बारे में पढ़ा जहाँ फिर मुझे विज्ञानं और एक महानवैज्ञानिक ने मेरे रहस्यों को सुलझाने का वैचारिक योगदान किया | वही Nikola जिन्हें उनके एक सपने ने १००० सालो के लिए अमर कर दिया तब मैंने भी अपने सपनो पर गौर करना शुरू किया मुझे भी कुछ ऐसा जानना था जो मेरे सपनो के कारण मुझे अमर कर दे मेरी खोज के कारण अब मुझे यकीं होने लगा था की सच में समयात्रा संभव हैं और मुझे ये भी लगता हैं की इसके बहोत सारे तरीक़े हैं हम भविष्य में अगर समय यात्रा कर सकेंगे तो वो भी बहोत अलग-अलग तरीक़े से जैसे आज भी हम कही जाने के यात्रा करते हैं लेकिन उसके भी कई सारे तरीक़े हैं कोई पैदल चलता हैं कोई साईकिल का इस्तेमाल करता हैं कोई गाडी का इस्तेमाल करता हैं और कोई तो हवाई जहाज से उढ़कर जाते हैं लेकिन सब का काम एक ही होता हैं | उसी प्रकार हम समय यात्रा भी अलग-अलग तरीक़े से कर सकेंगे |  उसी में समय की यात्रा सपनो में से होंगी वैसे ये मेरी भविष्य की तैयारी के लिए हैं जो मुझे १००० सालो तक उस अविष्कार के रूप में जिंदा रखेंगी |

    उस सपने के आलंकन करने के बाद मुझे समय में जो हलचल दिखी उसके हिसाब से मुझे सपनो के दरवाजे की खोज करने की असीम जिज्ञासा हुई और मैंने कुछ तःथ्यो पर ध्यान दिया की ये क्यों हम जो देखते हैं सपनो की दुनिया में और हमारी दुनिया में समय का फरक क्यों ?  शायद अभी मेरी कडियाँ जुड़ना शुरू हो रही थी | मुझे बहोत दिलचस्पी होने लगी अपने सपनो के इन सवालों को जानने के लिए | मुझे मेरे हर सवालों के जवाब धुंधले से समझ आ रहे थे लेकिन कोई ठोस सबुत नही बस खोज ही चल रही थी | सपनो के इस सफ़र के इस चरण में मुझे अपने दिमाग पर और ध्यान लगाने के लिए मजबूर कर दिया मुझे लगने लगा की जैसे हम किसी ROBOT में कोई यंत्र लगाते या किसी MOBILE  में संपर्क करने के लिए SIM CARD लगाते हैं उसी प्रकार ये कल्पनाये और सपने किसी प्रकार का संदेश हैं और उसका संपर्क केंद्र दिमाग हैं | लेकिन हर जवाब के साथ मुझे एक नया सवाल मिलता था जैसे मुझे एक नया सवाल मिला अगर सपने एक संदेश हैं और इस सदेश को दिमाग से हम प्राप्त करते हैं तो इन्हें भेजता कोण हैं ?

 

 

अगर कोई विज्ञानवादी  दोस्त होंगा तो कृपया मुझे इन सवालों के जवाब दे मैं जल्दी ही अगले भाग के साथ आपके सामने हाजिर रहूँगा | अगर मेरे आर्टिकल पर आपको कुछ टिपण्णी देना हैं तो कृपया विस्तार में दीजिये और इसे अपने विज्ञानवादी दोस्तों के साथ शेयर करे देखते कितने लोग मेरे साथ इस रहस्य को सुलझाने में मेरी मद्दत करेंगे |

 

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