हम सपने क्यों देखते हैं ? (भाग-३)

हम सपने क्यों देखते हैं ?

सपनो की दुनिया (३)

सपनो की दुनिया के भाग २ में मैंने बहोत ही रोचक तथ्यों के बारे में बताया हैं अगर आपने उसे पढ़ा नही हैं तो कृपया उसे पढ़िए हमने सपनो की दुनिया और समय यात्रा के बारे में वहां अपने विचार व्यक्त किये हैं मै उसकी लिंक निचे दे दूँगा | जैसे जैसे सपनो के इस रहस्य को मैं सुलझा रहा हूँ वैसे वैसे ब्रह्मांड के कुछ अनोखे तथ्य मेरे सामने आकर खुल रहे हैं |

 

सपनो के रहस्यों को सुलझाने के लिए हमे १३ दिन पुरे हो गए और हमे कई सारे नए सवाल और कुछ वैज्ञानिको के तथ्यों से रहस्यों को सुलझाने का तरीका मिला हैं | लेकिन ये सिर्फ तथ्यों पर आधारित हैं इसका कोई ठोस प्रमाण हमारे पास नहीं | मैं आपको एक बार फिर बताना चाहूँगा ये सपनो के रहस्यों को सुलझाने का परिक्षण मैंने अपने स्वंय के अभ्यास और अनुभव के आधार पर किया हैं इसीलिए अगर आपको ये सब बेतुका लगता हैं तो आप इसे यही पर पढना बंद कर सके हैं | विज्ञान के दुनिया हमारे लिए एक वरदान हैं जहाँ हम इस ब्रह्मांड को अच्छे से समझ सकते हैं | बहोत लोगो ने मुझे ये सवाल किया की इस ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाने से मानव जाती को क्या लाभ हैं | मानव जाती ही एक ऐसी जाती हैं जो हर पल विकसित होते जाती हैं हमारा विकास ही हमारे आने वाले भविष्य को उज्जवल बनाएगा | इस ब्रह्मांड के रहस्य में ही हमारे मानव के कई सारे प्रगतिशील तथ्यों का भी रहस्य छुपा हुआ हैं जो रहस्य हमे मनुष्य की असीम ताक़त का एक अमूल्य भाग प्रधान करेंगी |

१३ दिन के उस संशोधन के बाद सपने को देखने का मेरा नजरिया पूरी तरह से बदल गया  मुझे बड़ा ही अजीब सा लगने लगा था सपनो के उन तथ्यों को जानकर जिनकी शायद मैंने कल्पना भी नही की होंगी | मैंने परग्रही के बारे में बहोत पहले से सुना था लेकिन अब मुझे सपनो में और उनके बिच कुछ संबंध होने की संभावना दिख रही थी | इस संबंध के बारे में मुझे १६ दिन की सुबह समझ आया मेरी मम्मी बोल रही थी की मै रात को कुछ बोल रहा था लेकिन उनके समझ में कुछ आ नही रहा था मुझे लगा ये मेरे सपने का रिएक्शन होंगा लेकिन फिर मैंने इसे गंभीरता से लेते हुए अपने कुछ दोस्तों से जाकर मिला और उन्हें उनके सपनो के बारे चर्चा करने लगा मैंने उस दिन १४ लोगो से मुलाकात की मुझे बहुत हैरानी वाली सामने आई उन्होंने मुझे बताया की उनके घर में कई बार ऐसा हुआ की उनके परिवार के कुछ सदस्य रात में नींद में कुछ बोल रहे थे लेकिन उन्हें कुछ समझ ही नही आया वे कुछ अलग ही भाषा में बात कर रहे थे वे बता रहे थे की उनकी आवाज में भी फरक दिख रही थी | अब मुझे लगने लगा था की ये किसी परग्रही द्वारा भेजे गए संदेश के कारण हो रहा हैं और मैंने पिछले लेख में अपनी संभावनाओं को आपके सामने लाया था की हमारा दिमाग एक प्रकार Communication  Device हैं जो दुसरो के संदेश लेने और भेजने के भी काम आता हैं |  

सपनो के इस रहस्यों को जानने के लिए मैंने कुछ धार्मिक बातों पर भी ध्यान दिया जैसे आत्मा का होना | इसमें कोई संदेह नही की आत्मा नही होती अगर आत्मा नही होती तो क्या मैं ये मानलू की सपनो की दुनिया का कोई अस्तित्व नही या फिर मृत्यु के पश्चात् हमारी तिथि पुर्नजन्म में होती हैं ? अगर पुनर्जन्म में मृत्यु के पश्चात् हमारी शुरुआत होती हैं तो मनुष्य को उसका पुर्नजन्म याद क्यों नही रहता क्या उसे कोई सपना भी नही आता या फिर कोई यादें जो उसके पुर्नजन्म को सिद्ध कर सकेंगे ? ये ऐसे सवाल हैं जहाँ विज्ञानं हमे पूर्ण रूप से संतुष्ट नही करता हैं  | लेकिन इस बात को बिलकुल भी नजरअंदाज नही करना चाहिए मैंने अपने सपनो उन लोगो को भी देखा हूँ जो पहले ही मर चुके थे फिर वे मेरे सपने में आते हैं तो मैं उन्हें आत्मा समझू या फिर मेरा अतीत ? अगर मैं उसे अपना अतीत कहू तो मुझे ऐसी कोई भी घटना याद नही जो मेरे अतीत में में और सपनो में दिखी क्युकी अगर मरे हुए लोग मेरे सपने आकर कुछ ऐसा करते हैं जिसकी कल्पना करना भी आसान नही | तो फिर ये कैसे संभव हैं कि मेरे सपनो में उनका आना कुछ लोग तो मुझे याद भी नही फिर भी वो मेरे सपने में आते हैं |

 

१५ दिन आया मुझे एक बहुत ही भयानक सपना आया मुझे मेरे भय से परिचित कराया जा रहा था | मुझे उची जगह से बहोत डर लगता हैं और मैं सपने में एक बहोत उची जगह से निचे गिर रहा था मेरी सासे तेज हो गई दिल की धड़कन भी जोर जोर से धडकने लगी मगर मैं निचे गिरू उसके पहले मेरी नींद खुल गई फिर मैंने सोने की कोशिश की और उस सपने को दोबारा देखने की कोशिश की मुझे मेरे सपने में मेरे गिरने से पहले की सब चीजे दिख रही थी लेकिन मेरे गिरने के बाद की कोई भी तस्वीर मेरे आखों के सामने नही आ रही थी | जब मैं ऊपर से गिर रहा था मैं अंधकार की ओर बढ़ रहा था मुझे कुछ भी दिखाई नही डे रहा था मुझे न ही समय का ज्ञात हो रहा था और न ही मेरी स्तिथि का मुझे सिर्फ मेरी गति महसूस हो रही थी वे भी अंत जैसे मैं किसी सफ़र पर हूँ | इस सफ़र में कोई तो राज था जो मुझे सपनो के दुनिया का राज बताने जा रहा था लेकिन मैं एक बात से हैरान था की मेरी नींद खुलने के बाद भी मेरी दिल की धड़कन और सासे जोर-जोर से चल रही थी जैसे मैं आसमान से गिर रहा हूँ | अगर मुझे दिल की बीमारी होती तो उस दिन शायद मैं मुश्किल में पढ़ सकता था | आखिर मेरे देखे हुए सपने का प्रभाव मेरी असल जिन्दगी में क्यों हुआ ? क्युकी जब तक मैं शारीरिक रूप से वहां उपलब्ध नही था तो मेरे शरीरी में जो हलचल हुई उसका कारण मेरा सपना नही होना चाहिए | तब मुझे समझ में आया की ये मेरे दिमाग का खेल था मेरा दिमाग सपने देखने के काम में व्यस्त था वो एक कंप्यूटर की तरह एक जगह फस सा गया था | उसी वजह से मेरा दिमाग मेरे सपने और मेरे शरीर के बिच में चयन नही कर पाया | इस शरीर और सपने की क्रिया को देखकर मुझे लगता हैं की हम भी शायद शारीरिक रूप से एक ना एक दिन सपने में जी सकेंगे | उसके लिए शायद हमे कई सालो लग जाए लेकिन मानव के विकास के लिए वहाँ जाना एक बहोत बड़ी कमियाबी बनकर उभर आएँगी | मेरे सपनो के रहस्यों को सुलझाने की कड़ी तो मुझे मिल ही गई थी बस मुझे उन कड़ीयो जो जोड़कर आगे बढ़ना था लेकिन हर बार की तरह इस बार भी मैं एक सवाल की जंजीर में फस गया क्या अभि तक १५ दिन हमने जो कुछ भी किया क्या वह सही हैं या ग़लत ?

 

अगर कोई विज्ञानवादी  दोस्त होंगा तो कृपया मुझे इन सवालों के जवाब दे मैं जल्दी ही अगले भाग के साथ आपके सामने हाजिर रहूँगा | अगर मेरे आर्टिकल पर आपको कुछ टिपण्णी देना हैं तो कृपया विस्तार में दीजिये और इसे अपने विज्ञानवादी दोस्तों के साथ शेयर करे देखते कितने लोग मेरे साथ इस रहस्य को सुलझाने में मेरी मद्दत करेंगे |

 

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